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DGS Dhinakaran

आप अपने मुंह से क्या उच्चारण करते है!

Bro. D.G.S Dhinakaran
05 Dec
कभी कभी हम आवेश में आ जाते हैं और उसका परिणाम न जानकर बोल देते हैं। बाद में जब हम यह समझते हैं कि हम ने ऐसे शब्द क्यों बोले तब हम अपने आवेशपूर्ण स्वभाव के लिए अपनी परिस्थितियों पर दोष लगाते हैं। तभी तो बाइबल हमें स्मरण दिलाती है कि जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा। (नीतिवचन 18:21) 

प्रभु यीशु को  कंगालों को सुसमाचार का प्रचार करने के लिए अभिष्कित किया गया था। बाइबल कहती है, ‘‘मनभावने वचन मधुभरे छत्ते के समान प्राणों को मीठे लगते,और हड्डियों को हरी भरी करते हैं।’’ (नीतिवचन 16:24) यीशु हमेशा अनुग्रह और शांति की बातों को बोलता था। एक दिन एक मनुष्य को लकवा था उसे कुछ लोग यीशु पास ले आए। बाइबल कहती है, ‘‘मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है। ’’ (1 शमूएल 16:7) यीशु उसकी पिछली जिंदगी जानता था और उस ने जाना कि ये अपने पाप के कारण बीमार है, परन्तु जब वे उसे यीशु के पास लाए तो उसका हृदय टूटा हुआ था। जब यीशु ने उस मनुष्य को देखा तो उसका हृदय खेदित हो गया । उसके अंदर एक बडी करुणा आई। इस मनुष्य की किसी को भी जरूरत नहीं थी,वह पाप में डूबा हुआ था और वह पूरी तरह से असमर्थ था। यीशु ने उसे कहा, ‘‘हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए। जो अनुग्रह के वचन थे। ये मनुष्य उसी पल चंगा हो गया।’’  हां, प्रभु यीशु मसीह को शांति का सुसमाचार, अनुग्रह और करुणा के वचनों को प्रचार करने के लिए भेजा गया था। 
जीवन का वचन

यीशु इस संसार में किसी भी मनुष्य की निंदा करने नहीं आया था। वह बीमार को चंगा करने और दुष्ट की शक्तियों से छुटकारा देने आया था। जब हम उसकी पवित्र आत्मा से भरे हुए होते हैं तभी उसके अनुग्रह और शांति के वचन बोलते हैं। यीशु मसीह आत्मा से उत्पन्न हुआ था इसलिए जो कुछ भी उस ने बोला उसी के अनुसार हुआ। बाइबल के अनुसार जो कुछ भी आप कहेंगे उसी के अनुसार आपके लिए होगा क्योंकि धार्मिकता के लिए मन से विश्वास किया जाता है और उद्धार के लिए मुंह से अंगीकार किया जाता है।’’ (रोमियों 10:10) यदि आप मुंह से अंगीकार करेंगे कि उसके कोडे खाने से मैं चंगा हो गया, तो आप चंगे हो जाएंगे। उसके विपरीत जब आप अपनी बीमारी के लिए बडबडाएंगे या शिकायत करेंगे तो आप अपनी चंगाई को लाने में देरी कर रहे हैं। उसी तरह से यदि आप किसी दुख का सामना कर रहे हैं और स्वयं पर तरस खाने के शिकार हो गए हैं तो आप उस परिस्थिति से कभी भी बाहर निकल नहीं पाएंगे परन्तु यदि आप ये अंगीकार करेंगे कि मैं जयवंत से भी बढकर हूं, तो आप निश्चय जयवंत होंगे। केवल यही नहीं जब आप दूसरे लोगों को भी प्रतिज्ञा के वचन बोलेंगे तो वे भी आशीष पाएंगे। इसलिए आप जो बात करते हैं चौकस रहें
Prayer:
प्रेमी पिता, मैं चौकसी से बात करने के लिए आपका अनुग्रह  चाहता/चाहती हूं। मेरी मदद करें कि मेरे अंधकार की घडियों में भी आपकी कभी न अनुत्तीर्ण होने वाली प्रतिज्ञा का उच्चारण करूं। केवल आप ही मुझे छुटकारा देने वाले और मेरी समस्याओं से जयवंत करनेवाले हैं। मेरे चारों ओर के लोगों के लिए मेरे मुंह से शांति और तसल्ली निकले जिससे कि वे आपके प्रेम को जान सके।

यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता/करती हूं,आमीन

1800 425 7755 / 044-33 999 000