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वचन परमेश्वर है!

Sharon Dhinakaran
02 Dec
बाइबल लेखन का एक समूह कई हजार वर्षों से लिखा गया था। यद्यपि पवित्र शास्त्र कई वर्षों से पहले लिखा गया था फिर भी उनमें इतना सामर्थ है कि वे हमें तसल्ली देते हैं। हम जब भी बाइबल पढते हैं, वो हमारी उन परिस्थितियों के अनुसार बोलते हैं जिनके द्वारा हम गुजरते हैं और इस प्रकार हम प्रोत्साहित होते हैं। ऐसा कैसे होता है? क्योंक़ि परमेश्वर के वचन के द्वारा वह हम से बात करता है। यूहन्ना 1:1 में हम पढते हैं: ‘‘आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।’’ जैसे कि वचन कहता है कि परमेश्वर उस पर कृपादृष्टि करता है जो उसके वचन को सुनकर थरथराता है। इसका मतलब यह है कि जो परमेश्वर के वचन का भय मानकर उसकी आज्ञा पर चलता है वही दिव्य कृपादृष्टि का आनन्द उठा पाएंगे। 

कभी कभी हम बाइबल को उसके मतलब को समझे बिना पढते हैं और इस प्रकार बुडबुडाते हैं कि परमेश्वर ने हमें अपने क्लेशों में मरने के लिए छोड दिया है। इस के विपरीत जब हम परमेश्वर की आज्ञाओं का आदर करते हैं तब परमेश्वर न केवल हमें आशीष देता है बल्कि अपने वचन के द्वारा हमारी रक्षा भी करता है। इफिसियों 6:17 में लिखा है, आत्मा का तलवार जो परमेश्वर का वचन है। एक भला व्यक्ति था जो एक जंगल का अफसर था और एक दिन वह अपने बेटे के कहने से घने जंगल में सैर करने गए। परन्तु अचानक उसके पिता को दफ्तर से फोन आया कि उसे किसी पत्री का निरीक्षण करना पडेगा। इसलिए उस ने अपने बेटे को एक बंदूक हाथ में दी और अपना काम करने उसे छोड कर चला गया। हाथी के सामने आते ही बेटा घबरा गया और उस ने जोर से पुकारा, पिताजी, मेरी मदद करें। वह उसे तब तक पुकारता रहा जब तक उसे याद आया कि उसके पिता जी ने उसकी सुरक्षा के लिए बंदूक का उपयोग करने को कहा था। बेटे ने बंदूक का उपयोग किया और वह उस हाथी को भगाने में कामयाब हुआ।
जीवन का वचन

उसी तरह परमेश्वर का वचन ही हमारी सुरक्षा है। बाइबल हमें सिखाती है, हमारा यह मल्ल युद्ध मांस से नहीं परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से और इस संसार के अंधकार के हाकिमों से और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। (इफिसियों 6:12) परमेश्वर आपको नहीं भूला और वह आपकी समस्याओं और आपके दुखों के बारे में अच्छी तरह से जानता है और इसलिए उस ने अपनी कभी न बदलने वाली प्रतिज्ञाएं आपको दी हैं। उन प्रतिज्ञाओं पर भरोसा रखें और अपनी स्थितियों में उन पर धावा करें। परमेश्वर के नियमों को अपने कठिन समयों पर भी मानें। वह आपको निश्चय छुटकारा देगा और आपको जयवंत करेगा। 
Prayer:
स्वर्गीय प्रेमी पिता, मैं आप के वचन के नियंत्रण में नहीं रही इसलिए मैं आप से क्षमा चाहता/चाहती हूं। मेरे संघर्षों के दौरान भी आप अपने नियमों का पालन करने के लिए मुझ पर कृपादृष्टि करें। मैं विश्वास करता/करती हूं कि आप मुझे छुटकारा देंगे और जयवंत करेंगे। हे प्रभु आप मेरे पांव के लिए दीपक और मेरे मार्ग के लिए उजियाला हैं। मैं आपके वचन की ज्योति में चलूं। 

यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता/करती हूं। आमीन

1800 425 7755 / 044-33 999 000