Loading...
Dr. Paul Dhinakaran

लज्जा से प्रशंसा !

Dr. Paul Dhinakaran
26 Mar
क्या लम्बे इतंजार ने आपकी आत्म अको निराश कर दिया है? परमेश्वर ने आपकी सभी निंदा को स्मरण रखा है जो आप ने इसे इतने लम्बे समय में सामना किया है। उसने आपके श्त्रुऑम को आपके बारे में तिरस्कार की बातों को सुना और उनके घृणित दृष्टि को देखा है। आप निराश न होवें न साहस छोडें। परमेश्वर आपको दूसरों से ऊंचा करके प्रतिष्ठित करेगा। वह आपके शत्रुओं के सामने मेज बिछाएगा। (भजन संहिता 23:5) दुगना सम्मान आपकी बाट जोह रह अहै। बाइबल से आपके लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर की प्रतिज्ञा है, ‘‘तुम्हारी नामधराई के बदले दूना भाग मिलेगा, अनादर के बदले तुम अपने भाग के कारण जयजयकार करोगे; तुम अपने देश में दूने भाग के अधिकारी होगे; और सदा आनन्दित बने रहोगे।’’ (यशायाह 61:7) 

मेरे पिता जी को प्रभु प्रगट हुए और उन्हें आज्ञा दी कि वे कारुण्या विश्वविद्यालय बनाए। उस समय हमारे दो कमरे का एक मकान था और वो भी गिरवी रखा हुआ था। एक पुरानी गाडी भी थी परन्तु जब प्रभु ने कहा कि विश्वविद्यालय को स्थापित करो, तो वे एक बैंक से दूसरे बैंक में उधार लेने निकल पडे। उधार लेने के लिए ऐसी कोई भी प्रमाण की चीज नहीं थी। उन्होंने निवेदन किया, ‘‘यीशु ने मुझे विश्वविद्यालय बनाने के लिए आज्ञा दी है, कृपया मुझे उधार दें।’’ बैंक के अफसर और शिक्षा के अफसर उन पर यह कहकर हंसने लगे, एक विश्वविद्यालय को शुरु करने के लिए तुम्हारी क्या योग्यता है? परन्तु मेरे पिता जी इधर उधर घूमते रहे और उस समय मेरी बहन एंजिल भी अनुचित मारी गई। उसके बाद भी वे घूमते रहे। मेरे दादा जी दुरैसामी ने कहा, प्रभु ने तुम्हें उस स्थान को दिखाया है परन्तु हम नहीं जानते वो कहां है। यद्यपि हमारे पास कोई पैसा नहीं है पर प्रभु निश्चय एक मार्ग निकालेगा, जैसे कि उसने ये कहा कि मैं एक स्थान को खोजने चारों तरफ जाऊंगा। वे ऊटी, कोडैकनाल घूमते रहे। आखिरकार हम कोईम्बटूर के पास सिरुवानी नामक एक स्थान को जो चारों ओर से पहाड ही पहाड हैं खोजा। मेरे पिता जी ने कहा, ‘‘यही वह स्थान है।’’ एक बैंक ने हमें भटकते हुए देखकर तरस खाकर पहला उधार दिया। मेरे दादाजी बिना जूतों के उस कांटों भरी ऊबड खाबड भूमि पर कई महीनों तक चले जिससे कि वे उस भूमि को खरीद सकें। कोई भी उस भूमि को बेचने वहां पर नहीं आया। लोग हमें यह कहकर भगा देते थे, ‘‘तुम कहां से आए हो?’’ ‘‘तुम कौन हो?’’ परन्तु आज उसी स्थान पर प्रभु ने 750 एकड जमीन देकर कारुण्या विश्वविद्यालय, स्कूल और अस्पताल स्थापित किए हैं। हजारों बच्चे और उनके द्वारा उनके पालक, बीमार, वृद्ध, मानसिक विकलांग और शारीरिक विकलांग आदि लोग आशीष पा रहे हैं।’’ 
प्रियजन, आपके चारों ओर के लोगों के मजाक उडाने के दुख के लिए परमेश्वर कहता है, ‘‘जिनकी लज्जा की चर्चा सारी पृथ्वी पर फैली है, उनकी प्रशंसा और कीर्त्ति सब कहीं फैलाऊंगा।’’ (सपन्याह 3:19)आप अनादर के कोषे में कभी नहीं रहेंगे। आपके राज्य में चालाकी, अफवाहें, धमकियां और मजाक कभी नहीं सुनाई देगा। डरो मत, खडे खडे वह उद्धार का काम देखो, जो यहोवा आज तुम्हारे लिए करेगा; क्योंकि जिन मिस्रियों को तुम आज देखते हो, उनको फिर कभी न देखोगे। (निर्गमन 14:13)  आपकी लज्जा प्रशंसा में बदल जाएगी। आप जातियों में महानता और आशीष के एक मुख्य चिह्न हो जाएंगे। परमेश्वर के नाम में शरण लें। मसीह की धार्मिकता पर आशा रखें न कि अपनी। वह आपकी ओर है। इसलिए हियाव बांधें।
Prayer:
प्रिय प्रभु,

अब तक आपके अनुग्रह से ही मैं बना रहा हूं। जैसे एक पिता अपने बच्चे को उठाए चलता है वैसे ही मुझे उठाकर चलने के लिए आपको धन्यवाद। मुझे एक मां की तरह शांति देने के लिए धन्यवाद। मेरी आशा आप में है मुझे लज्जित  न करें। हे प्रभु, आपके नाम की खात्तिर मेरे सिंग को ऊंचा करें। जिन्होंने मेरा मजाक उडाया है उनके बीच में मुझे आदर दिलाएं। मैं अपने जीवन में आपकी महानता को देखूं। यीशु के नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं, आमीन!

For Prayer Help (24x7) - 044 45 999 000