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Paul Dhinakaran

महिमामय रूप से बने रहना!

Dr. Paul Dhinakaran
18 Aug
कई वर्ष पहले 1960 को मेरे पिता जी ने यीशु का एक दर्शन देखा। उस समय परमेश्वर का एक दास था जो मेरे पिताजी को प्रेरित करता था। वे अपनी पत्नी के साथ मेरे पिता के पास आते थे और पवित्रशास्त्र से पवित्र आत्मा के वरदानों, परमेश्वर के साथ चलन, परमेश्वर की आवाज को सुनने, और उसके साथ लम्बे समय तक प्रार्थना करने के बारे में बातें करते थे। एक विशेष दिन 10 अक्टूबर 1962 को पारिवारिक प्रार्थना करते समय यीशु मेरे पिता जी को प्रगट हुए और उनसे बातें की। वे पवित्र आत्मा से भर गए थे। उस घटना के बाद परमेश्वर के उस जन ने कहा, भाई, प्रार्थना की जरूरत हो तो किसी भी समय मेरे घर आ सकते हो। मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करूंगा। तुम्हारी आवश्यकताओं के समय मुझ से संपर्क करें। मैं तुम्हारी मदद के लिए हमेशा उपलब्ध रहूंगा। तुम मुझ पर हर समय निर्भर रह सकते हो।मेरे पिता जी उस पर पूरी रीति से विश्वास करते थे और वे किसी भी चीज के लिए उनके पास दौड पडते थे। सात सालों के बाद जब मेरे पिता जी के फेफडे प्रभावित हुए हम सब परमेश्वर के इस जन पर मदद के लिए निर्भर रहे। हमारे आश्चर्य की बात यह थी कि वह ताना मारने का व्यवहार करने लगा। उसने निंदा की बातों को कहा, तुम्हारे अंदर कुछ पाप हैं । तुम ने अपने जीवन में शैतान को अनुमति दी है। मेरी प्रार्थनाएं तुम्हारे पापमय व्यवहार के कारण आशीष को लाने में रूकावट ला रही है। यह वह पल था जब यीशु ने हमें अपने नजदीक खींचा और कहा, मेरे बेटे, मैं चाहता हूं कि तुम केवल मुझी पर विश्वास रखो। कोई भी मनुष्य तुम्हारी मदद नहीं कर सकता। केवल मेरे साथ तुम बहुत फल ला सकते हो। इस परिस्थिति में सभी अनावश्यक डालियों को उखाड देगा और आपको एक फल लानेवाला एक वृक्ष बनाएगा। तब से मेरे पिता और मेरी माता परमेश्वर की ओर फिरे। वे परमेश्वर की अगुवाई से अद्भुत मार्गों का आनन्द उठाने लगे। हां,तब से यह मेरे पिता और यीशु जो सच्ची दाखलता था।वे यीशु जो सच्ची दाखलता है उसमें सटे रहे,मेरे पिता उसके राज्य के लिए अधिक फल लाना शुरु हुए। उनकी सेवकाई विदेशों में भी बढने लगी। यीशु ने कहा, ‘‘मैं सच्ची दाखलता हूं।’’ (यूहन्ना 15:1)
आज यीशु को चुने और उस पर भरोसा रखें और उससे लिपटे रहें। प्रभु यीशु मसीह कहता है,‘‘तुम मुझ में बने रहो, मै तुझ में। यदि डाली दाखलता में बनी न रहे तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूं; तुम डालियां हो। जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।’’ (यूहन्ना 15:4,5) वह आपकी थकी हुई आत्मा को नया करेगा और आपको बल देगा। इस पृथ्वी पर आप एक प्रफुल्लित जीवन व्यतीत करेंगे।
Prayer:
प्रेमी स्वर्गीय पिता, मैं लोगों पर भरोसा रखने से पश्चाता हूं। आज मैं आप पर निर्भर होने के लिए आपको और आपकी प्रतिज्ञाओं को चुनता हूंकि इस पृथ्वी पर एक समृद्धि और भरपूरी का जीवन बिताऊं। मुझ पर अनुग्रह करें कि मैं हर समय आप में बना रहूं। मनुष्य या कोई भी स्थिति मुझे आप के महान प्रेम से अलग करने न पाए। यीशु के पराक्रमी नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं, आमीन!

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