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Dr. Paul Dhinakaran

समझ से बाहर आशीषें!

Dr. Paul Dhinakaran
03 Dec
इस अध्याय में 2 साधारण वचनों पर एक बहुत ही विशाल व्याखयां दी गई है: आशीष और श्राप। एक साधारण व्यक्ति की बोली में- यदि वह आज्ञाकारी है तो वह व्यक्ति आशीषित है और यदि वह अवाज्ञाकारी है तो श्रापित है। यीशु इस पृथ्वी पर छुटकारे की एक दिव्य योजना को पूरा करने आया। उस ने हमारे पापों और श्रापो को उठा लिया और उस ने हमें अपने पापों और श्रापो से स्वतंत्र करने के लिए क्रूस पर खुद का बलिदान किया। परन्तु छुटकारे के इस मुफ्त दान को बार बार पाप करके गलती नहीं करनी चाहिए, जैसे कि पौलुस निश्चित रूप से लिखता है, तो क्या हुआ? क्या तुम इसलिए पाप करें कि हम व्यवस्था के अधीन नहीं वरन अनुग्रह के अधीन हैं? कदापि नहीं! (रोमियों 6:15)

यीशु दुखों के एक अव्याखयां पथ से गुजरा जिससे कि हम एक आशीषित जीवन व्यतीत करें। हम कैसे एक आशीषित जीवन व्यतीत कर सकते हैं? यदि समय हमारा साथ भी न दे तौभी हम उसके नियमों पर यत्न से चलें,प्रतिदिन प्रार्थना करें, उस पर भरोसा रखें। अब से 60 से भी अधिक वर्ष बीत चुके हैं जब मेरे पिताजी (स्वर्गीय) भाई डी जी एस दिनाकरन इस चेन्नई शहर में पहली बार आए। वे नौकरी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर गए। वे जिस इंटरव्यू के लिए गए वहां से उन्हें एक ही उत्तर मिला कि ‘‘तुम जा सकते हो, यहां पर तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है।’’ मेरे पिता जी ने प्रभु पर भरोसा रखा और आज हम सभी नगर में धन्य हैं। अपने जीवन के समय में उन्होंने हजारों लोगों को नौकरियां दिलाई। परमेश्वर ने आशीष दी और सेवकाई को भी लगातार आशीष देता आ रहा है जिसके द्वारा खेदित मनवालों के ‘आंसू पोंछ दिए जाते हैं।’
जीवन का वचन 

परमेश्वर आपको भी आशीष देगा। जब आप अपने जीवन को पूरी तरह से प्रभु के हाथों में सौंपते हैं,तब वह आपको व्यक्तिगत और पारिवारिक रूप में ऊंचा उठाएगा। शायद आप अस्वीकृति,क्षतियों और कठिन परिस्थिति से गुजर रहे होंगे। एक बात याद रखें यीशु हमेशा आपके लिए होगा। वह कभी भी आपको अस्वीकार नहीं करेगा। जब आप उसके पास जाएंगे, वह आनन्दित होकर आपके साथ वास करेगा। वह आपकी पुकार को सुनेगा और आपके जीवन में आश्चर्यकर्मों और चमत्कारों के द्वारा उत्तर देगा। वह केवल आप को आशीष ही नहीं देगा बल्कि आपको दूसरों की आशीष के लिए एक माध्यम बनाएगा। इसलिए आप कौन हैं और आप किस कठिनाई से गुजर रहे हैं,आप केवल यीशु की ओर फिरें जिससे कि वह आपकी सभी समस्याओं से स्वतंत्र करेगा और आपको बहुतायत की आशीष देगा। मत्ती 24:35 में हम पढते हैं: ‘‘आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेगी।’’ परमेश्वर की हर प्रतिज्ञा पूरी होगी। विश्वास करें और प्राप्त करें!
Prayer:
स्वर्गीय प्रेमी पिता, मैं आपकी कभी न बदलनेवाली प्रतिज्ञाओं के लिए धन्यवाद करता/करती हूं। मुझे आपकी आज्ञाओं को मानने की कृपादृष्टि दें। जब मैं अपने जीवन में किसी भी परिस्थिति से गुजरूं तब मैं अपने विश्वास में ठोकर न खाऊं क्योंकि मैं यह विश्वास करता/करती हूं कि आप हमेशा मेरे साथ हैं। हे प्रभु मुझे आशीष दें जिससे कि मैं दूसरों के लिए एक आशीष बनूं। 

यीशु के नाम में,मैं प्रार्थना करता/करती हूं। आमीन

1800 425 7755 / 044-33 999 000