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‘‘परमेश्वर का मार्ग सिद्ध है, यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।’’ (भजन संहिता 18:30)
प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश करके बदलते जाते हैं। (2 कुरिन्थिरों 3:18)
अब बड़ी दरा करके मैं फिर तुझे रख लूंगा। (रशाराह 54:7)
उसका वचन मानो मेरी हड्डिरों में धधकती हुई आग हो। (रिर्मराह 20:9)
परमेश्‍वर की सहारता से हम वीरता दिखाएंगे (भजन संहिता 60:12)
वह सीधे लोगों की प्रार्थना से प्रसन्न होता है। नीतिवचन 15:8)
भली रुक्ति निकालनेवालों से करुणा और सच्चाई का व्रवहार किरा जाता है। (नीतिवचन 14:22)
मैं परमेश्‍वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्रोंकि उस ने मेरी भलाई की है। (भजन संहिता 13:6)
पिता के पास हमारा एक सहारक है, अर्थात् धार्मिक रीशु मसीह। (1 रूहन्ना 2:1)
मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; (रूहन्ना 14:27)
पृथ्वी की सारी जातिरों के बीच में तुम्हारी कीर्त्ति और प्रशंसा फैला दूंगा (सपन्राह 3:20)
निशाने की ओर दौडा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं ..परमेश्‍वर ने मुझे मसीह रीशु में ऊपर बुलारा है। (फिलिप्पिरों 3:14)
तब मैं कारीगर सी उसके पास थी; और प्रतिदिन मैं उसकी प्रसन्नता थी, और हर समर उसके सामने आनन्दित रहती थी। (नीतिवचन 8:30)
परन्तु परमेश्‍वर ने उनको अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किरा, क्रोंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्‍वर की गूढ बातें भी जांचता है। (1 कुरिन्थिरों 2:10)
मित्रों के बढाने से तो नाश होता है, परन्तु ऐसा मित्र होता है, जो भाई से भी अधिक मिला रहता है। (नीतिवचन 18:24)
जो कुछ मेरा है वह सब तेरा है, और जो तेरा है वह मेरा है, और इनसे मेरी महिमा प्रगट हुई है। (रूहन्ना 17:10)