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Stella dhinakaran

परमेश्वर हमारी प्रार्थना का निश्चय सुनता है।

Sis. Stella Dhinakaran
15 Mar
जब कभी भी हम अपने जीवन में भयंकर कष्ट जैसे तूफान, समस्याएं और चिंता का सामना करते हैं जब हम ईश्वरीय भयभक्ति से प्रभु को पुकारते हैं तो वह तुरंत हमारी प्रार्थना सुनता है। वह हमें छुटकारा देता है और हमें बचाता है। परन्तु जब हम परमेश्वर के ज्ञान से घृणा करते हैं और उसकी सलाह पर कान नहीं लगाते हैं और उससे विभिन्न रहते है वह हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं देगा परन्तु वह चुप हो जाएगा। ‘‘वरन आंधी के समान तुम पर भय आ पडेगा, और विपत्ति भवण्डर के समान आ पडेगी, उस समय जब वे पुकारेंगे मैं न सुनूंगी क्योंकि उन्होंने ज्ञान से बैर किया, और यहोवा का भय मानना उनको न भाया।’’ (नीतिवचन 1:27-29) प्रभु का भय मानने का अर्थ यह कि उसमें प्रसन्न रहना और उसके वचन पर कान लगाना। 

एक परिवार के सदस्य अपने मन की इच्छाओं से एक विलासप्रिय जीवन व्यतीत करते थे। वे चर्च नहीं जाते थे और प्रभु को नहीं खोजते थे। सांसारिक सुख जो परमेश्वर के क्रोध को लाता है उन्हें खुशियां देता था और वे एक नामधारी मसीही के रूप में रहते थे और वे अपने समय को गंवाते थे। उस परिवार का एक सदस्य जॉयस एक कॉलेज में पढती थी। उसने अपने एक सहपाठी के अच्छे गुण और अपनी पढाई में उत्तमता देखी। उसने उससे उसकी सफलता का राज पूछा। उसे पता चला कि वह एक पासवान की लडकी है और वे बडी उत्कृटता से प्रभु को खोजते थे। इसलिए प्रभु ने उन्हें बहुतायत की आशीषें दी थी। इस सच ने जॉयस को आश्चर्यचकित किया। उसके बाद उस ने भी अपनी सहेली के साथ प्रभु को खोजना शुरु किया और वह उद्धार के आनन्द से भर गई और अंत में उसने यह जान लिया कि एक सच्चे मसीही जीवन की महानता क्या होती है और उसने अपने परिवार के सदस्यों के लिए भी प्रार्थना की कि वे भी इस आनन्द को पाएं जिसको उस ने पाया है।
नि:संदेह परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देगा क्योंकि हमारा परमेश्वर अपनी संतानों की प्रार्थनाएं सुनता है। उस ने न केवल हम से प्रतिज्ञा की वह हमारी प्रार्थनाओं को सुनेगा बल्कि उस ने हमें उत्साहित भी किया कि हम नहीं डरें। ‘‘भयभीत न हो क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है।’’(लूका 1:3) परमेश्वर ने जॉयस की प्ररथना को सुनने के लिए अति आनन्दित हुआ होगा क्योंकि उस ने यह भी प्ररथना की कि उसका परिवार भी यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्त्ता मानें। उसी तरह से जब हम प्रार्थना करें,आइए हम इस तरह से प्रार्थना करें कि हमारे जीवन में परमेश्वर की इच्छा पूरी हो। आइए हम परमेश्वर की उपस्थिति में प्रसन्न रहें क्योंकि परमेश्वर का वचन कहता है ‘‘यहोवा को अपने सुख का मूल जान,और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।’’ (भजन संहिता 37:4) 
Prayer:
धन्य पिता, मेरे जीवन को बदलें क्योंकि यदि मैं आपके मार्ग से अलग हूं तो मेरी मदद करें कि आज ही से मैं अपने जीवन में आपका भय मानूं और केवल आपके मार्गों पर चलूं। मुझे अनुग‘ह दें कि मैं सभी संकटों से स्वतंत्र रहूं। मुझे आपके मार्ग में अगुवाई करें हे पिता, यीशु के नाम में मैं प्रार्थना करता /करती हूं, आमीन!

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